रविवार, 06 दिसंबर 2048 के लिए New Delhi, Delhi, IN, India का दैनिक पंचांग, जो Astrology Divine द्वारा तैयार किया गया है, एक गहरे ज्योतिषीय मार्गदर्शक का दर्शन है। वेदीय परंपराओं में निहित इस पंचांग में तिथि (चंद्रमा का दिन), नक्षत्र (नक्षत्र), योग और करण जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को शामिल किया गया है। New Delhi, Delhi, IN के विशेष ऊर्जा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया यह पंचांग हिन्दू परंपराओं का पालन करने वाले व्यक्तियों के लिए एक अमूल्य साधन है। शुभ और अशुभ समयों के सटीक इंजन मिलाकर, यह दैनिक पंचांग दैहिक गतिविधियों, धार्मिक कार्यों और सांस्कृतिक घटनाओं की योजना बनाने के लिए एक विश्वसनीय साथी बन जाता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन सुनिश्चित करता है कि New Delhi, Delhi, IN में रविवार, 06 दिसंबर 2048 को एक आध्यात्मिक और समर्थ प्रवृत्ति हो।
| तिथि | प्रतिपदा शुक्ल Paksha नंदा upto 17:21:27 देवता: ब्रह्मा अगली: द्वितीया (शुक्ल) |
| नक्षत्र | ज्येष्ठा Pad 3 upto 13:24:51 देवता: इंद्र (देवताओं के राजा) स्वामी: बुध (जल) अगला: मूल |
| योग | धृति upto 07:59:15 दृढ़ता — धैर्य और स्थिरता वाला स्वभाव। अगला: शूल |
| करण | किंस्तुघ्न upto 07:10:40 अगला: बव |
| वार (दिन) | रविवार (रविवार) |
| विक्रम संवती | 2105 वृक्ष स्वामी: मंगल इस वर्ष जन्मे व्यक्ति कार्य में धीमे होंगे, आलसी हो सकते हैं और अधिकतर दूसरों की सेवा में रहेंगे। |
| शक संवती | 1970 विभव स्वामी: विष्णु |
| गुजराती संवत | 2105 वृक्ष |
| कलि संवत / कलियुग | 5148 |
| पूर्णिमांत / अमांता | मार्गशीर्ष / मार्गशीर्ष |
| प्रविष्टे (सौर दिवस) | 21 |
| लाहिड़ी अयनांश | 24.547405° |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:52:02 – 12:33:38 |
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:11:57 – 06:06:24 |
| विजय मुहूर्त | 13:56:50 – 14:38:26 |
| गोधूलि मुहूर्त | 17:24:49 – 17:52:03 |
| अमृत काल | 05:40:30 – 07:04:56 |
| निशीथ काल (मध्यरात्रि) | 23:45:58 – 00:40:26 |
| प्रातः संध्या | 05:39:10 – 07:00:51 |
| सायं संध्या | 17:24:49 – 18:46:30 |
| राहु काल | 16:06:49 – 17:24:49 |
| यमघण्ट काल | 12:12:50 – 13:30:49 |
| गुलिका काल | 14:48:49 – 16:06:49 |
| दूर मुहूर्त | 16:01:37 – 16:43:13 |
| वर्ज्यम् | 21:13:57 – 22:38:23 |
| अग्निवास (हवन/यज्ञ) | पृथ्वी पर सर्व सिद्धिप्रद (पूर्ण सफलता) अग्नि का वास पृथ्वी पर है। हवन एवं यज्ञ अनुष्ठान के लिए अत्यंत शुभ फलदायी। |
| शिववास (रुद्राभिषेक) | गौरी सान्निध्य सुख-सम्पत्ति (ऐश्वर्य) भगवान शिव माता पार्वती के साथ हैं। रुद्राभिषेक के लिए अत्यंत शुभ फलदायी। |
| दिशा शूल | पश्चिम उपाय: यात्रा से पूर्व पान या घी का सेवन करें |
| होमाहुति ग्रह | सूर्य (☉) |
| चंद्र निवास | उत्तरराहु वास: उत्तर |
| आनंददी योग | काण मानसिक परेशानी (क्लेश) |
सूर्योदय कालीन आकाशीय ग्रह स्थिति एवं लग्न चक्र
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र (पद) | गति |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | | 20° 03' | ज्येष्ठा पद 2 | मार्गी (D) |
| चंद्र | | 25° 57' | ज्येष्ठा पद 3 | मार्गी (D) |
| मंगल | | 00° 15' | धनिष्ठा पद 3 | मार्गी (D) |
| बुध | | 01° 53' | मूल पद 1 | मार्गी (D) |
| गुरु | | 02° 54' | मृगशिरा पद 3 | वक्री (R) |
| शुक्र | | 05° 15' | उत्तराषाढ़ा पद 3 | मार्गी (D) |
| शनि | | 19° 59' | पूर्वाषाढ़ा पद 2 | मार्गी (D) |
| राहु | | 24° 08' | ज्येष्ठा पद 3 | वक्री (R) |
| केतु | | 24° 08' | मृगशिरा पद 1 | वक्री (R) |
| लग्न | | 19° 09' | ज्येष्ठा पद 1 | मार्गी (D) |
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संस्कृत शब्द पंचांग दो शब्दों से बना है: पंच (पांच) + अंग (तत्व या भाग)। अपने शुभ कार्यों व दैनिक गतिविधियों को इन खगोलीय ऊर्जाओं के साथ जोड़ना सफलता, मानसिक शांति और समृद्धि लाता है।
सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12° की कोणीय दूरी को एक तिथि कहा जाता है। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) में 15-15 तिथियों में विभाजित होती हैं। तिथि कार्य की भावनात्मक ऊर्जा तय करती है।
आकाश मंडल 13°20' के 27 नक्षत्रों में विभाजित है। किसी समय विशेष पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में गोचर कर रहा होता है, वह उस समय की मानसिक वृत्ति, यात्रा, विवाह और महत्वपूर्ण कार्यों के फल को सबसे अधिक प्रभावित करता है।
सूर्य और चंद्रमा के निरयण देशांतर के जोड़ को 27 भागों में बांटने से 27 योग बनते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, और रवि योग जैसे शुभ योग सभी दोषों को शांत कर कार्यों में निश्चित सफलता दिलाते हैं।
एक तिथि के आधे भाग (6° दूरी) को करण कहा जाता है। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)। करण सूक्ष्म समय-खंड होता है जो व्यापार, आर्थिक निवेश, यात्रा और निर्माण कार्यों का सटीक मुहूर्त तय करता है।
स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि 'वार' कहलाती है। प्रत्येक वार के अधिष्ठाता ग्रह होते हैं (रविवार-सूर्य, सोमवार-चंद्र, मंगलवार-मंगल, बुधवार-बुध, गुरुवार-गुरु, शुक्रवार-शुक्र, शनिवार-शनि)।
प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की अवधि छाया ग्रह राहु के आधिपत्य में होती है। नया व्यवसाय शुरू करना, अनुबंध पर हस्ताक्षर, विवाह, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य राहुकाल में करने से विघ्न आने की संभावना रहती है।
हिन्दू पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ज्योतिषीय गणना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न व उत्तर।
प्रत्येक स्थान के सटीक अक्षांश (Latitude) व देशांतर (Longitude) अनुसार स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि व शुभ मुहूर्त।