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चौघड़िया मुहूर्त शनिवार, 29 अगस्त 2026 के लिए

दिन और रात्रि के शुभ-अशुभ चौघड़िया मुहूर्त (अमृत, शुभ, लाभ, चर, रोग, काल, उद्वेग) की सटीक दृक गणना आपके शहर के लिए।

चौघड़िया मुहूर्त की गणना की जा रही है...

वैदिक चौघड़िया ज्ञान

चौघड़िया के 7 प्रकार एवं उनका फल

चो-घड़िया का अर्थ है 'चार घड़ियां' (लगभग 96 मिनट)। 24 घंटे के दिन को 16 चौघड़िया (8 दिन और 8 रात) में बांटा जाता है। जानें किस चौघड़िया में कौन सा कार्य करना चाहिए:

1. अमृत (अति शुभ)

स्वामी: चंद्रमा। यह सभी चौघड़िया में सर्वोत्तम माना जाता है। इस मुहूर्त में सभी प्रकार के मांगलिक कार्य, यात्रा, शिक्षा, गृह प्रवेश और नवीन शुरुआत करना अत्यंत फलदायी होता है।

2. शुभ (उत्तम फलदायी)

स्वामी: देवगुरु बृहस्पति। विवाह, यज्ञ, धार्मिक अनुष्ठान, विद्यारंभ और मांगलिक कार्यों के लिए शुभ चौघड़िया सर्वश्रेष्ठ है।

3. लाभ (उन्नति एवं धन)

स्वामी: बुध ग्रह। नया व्यापार शुरू करने, दुकान का उद्घाटन, आर्थिक निवेश, बहीखाता प्रारंभ और शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए लाभ चौघड़िया लाभकारी रहता है।

4. चर (गतिशील एवं सामान्य)

स्वामी: शुक्र ग्रह। यात्रा, वाहन क्रय, स्थानांतरण, विदेश गमन और गतिशील गतिविधियों के लिए चर चौघड़िया उत्तम है। स्थिर कार्यों में इसका प्रभाव मध्यम रहता है।

5. रोग (अशुभ / व्याधि)

स्वामी: मंगल ग्रह। इस अवधि में नए कार्य आरंभ करने से विवाद, हानि व स्वास्थ्य कष्ट होने का भय रहता है। केवल शत्रु दमन या युद्ध संबंधी कार्यों में इसका उपयोग होता है।

6. काल (अशुभ / विलंब)

स्वामी: शनि देव। काल चौघड़िया में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। इस समय किए गए कार्यों में भारी रुकावटें, विलंब और असफलता की संभावना रहती है।

7. उद्वेग (चिंता / अशांति)

स्वामी: सूर्य देव। उद्वेग चौघड़िया में मानसिक अशांति व तनाव रहता है। इसे सामान्य शुभ कार्यों में त्याज्य माना गया है, परंतु सरकारी व प्रशासनिक कार्यों के लिए यह उपयुक्त हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया मुहूर्त से जुड़े सामान्य प्रश्न

चौघड़िया की गणना, शुभ समय और दैनिक उपयोग से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल व जवाब।

चौघड़िया वैदिक ज्योतिष का एक लोकप्रिय मुहूर्त साधन है, जिसमें दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात्रि (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को 8-8 बराबर भागों में बांटा जाता है। यह तुरंत यह जानने में मदद करता है कि वर्तमान समय किसी यात्रा, व्यापार, खरीदारी या शुभ कार्य के लिए अनुकूल है या नहीं।

अमृत (Amrit), शुभ (Shubh) और लाभ (Labh) को सर्वश्रेष्ठ व शुभ चौघड़िया माना जाता है। चर (Char) चौघड़िया यात्रा और स्थानांतरण के लिए शुभ होता है।

रोग (Rog), काल (Kaal) और उद्वेग (Udveg) को अशुभ माना गया है। इन अवधियों में नया व्यापार, लेन-देन, अनुबंध या मांगलिक कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।

हाँ, चौघड़िया की गणना स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर निर्भर करती है। चूंकि प्रत्येक शहर के अक्षांश और देशांतर भिन्न होते हैं, इसलिए चौघड़िया की समय सीमा भी शहर के अनुसार कुछ मिनटों तक बदलती है।

यदि शुभ चौघड़िया (जैसे अमृत या लाभ) के दौरान राहुकाल पड़ रहा हो, तो भी राहुकाल की अवधि में नया मांगलिक कार्य शुरू करने से बचना चाहिए। राहुकाल समाप्त होने के बाद ही कार्य आरंभ करना उत्तम माना जाता है।
स्थान अनुसार वैदिक पंचांग

प्रमुख धार्मिक तीर्थ व शहरों का दैनिक पंचांग

प्रत्येक स्थान के सटीक अक्षांश (Latitude) व देशांतर (Longitude) अनुसार स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि व शुभ मुहूर्त।

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