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रविवार, 31 मार्च 2019 का पंचांग

रविवार, 31 मार्च 2019 के लिए New Delhi, Delhi, IN, India का दैनिक पंचांग, जो Astrology Divine द्वारा तैयार किया गया है, एक गहरे ज्योतिषीय मार्गदर्शक का दर्शन है। वेदीय परंपराओं में निहित इस पंचांग में तिथि (चंद्रमा का दिन), नक्षत्र (नक्षत्र), योग और करण जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को शामिल किया गया है। New Delhi, Delhi, IN के विशेष ऊर्जा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया यह पंचांग हिन्दू परंपराओं का पालन करने वाले व्यक्तियों के लिए एक अमूल्य साधन है। शुभ और अशुभ समयों के सटीक इंजन मिलाकर, यह दैनिक पंचांग दैहिक गतिविधियों, धार्मिक कार्यों और सांस्कृतिक घटनाओं की योजना बनाने के लिए एक विश्वसनीय साथी बन जाता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन सुनिश्चित करता है कि New Delhi, Delhi, IN में रविवार, 31 मार्च 2019 को एक आध्यात्मिक और समर्थ प्रवृत्ति हो।

आज का पर्व और व्रत 1 सूचीबद्ध
बाण: राज
Royal / Government Obstacles

24 घंटे का दृश्य पंचांग टाइम-चार्ट

लाइव 10:31:45 AM
रविवार, 31 मार्च 2019 New Delhi, Delhi, IN • सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक 24 घंटे का विस्तृत चक्र
शुभ मुहूर्त अशुभ काल दिन रात
24 घंटे देखने के लिए चार्ट को दायें-बायें स्वाइप करें 🌅 24H Cycle
दिन/रात
समय (24H)
तिथि
नक्षत्र
योग
करण
काल / मुहूर्त
दिन का समय (Daytime)
रात्रि काल (Nighttime)
06:13 AM
06:38 PM
06:12 AM
9 AM
12 PM
3 PM
6 PM
9 PM
12 AM
3 AM
6 AM
एकादशी (कृष्ण) तक 06:04 AM
द्वादशी (कृष्ण) तक 08:44 AM
श्रवण तक 06:46 PM
धनिष्ठा तक 09:55 PM
सिद्ध तक 07:14 PM
साध्य तक 08:17 PM
बव तक 04:43 PM
कौलव तक 07:24 PM
अमृत काल
अभिजित
यमघंट
विजय मुहूर्त
गुलिक काल
दुर्मुहूर्त
राहुकाल
गोधूलि मुहूर्त
वर्ज्यम
निशीथ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त
किसी भी खंड पर होवर / टैप करके वैदिक प्रभाव व समय देखें। रविवार, 31 मार्च 2019 | New Delhi, Delhi, IN
सूर्य एवं चंद्र चक्र वसंत Ritu
सूर्योदय 06:13:18
सूर्यास्त 18:38:35
चंद्रोदय 03:25:04
चंद्रास्त 14:19:08
सूर्य राशि मीन मीन ♓
उत्तर भाद्रपद (पद 4)
चंद्र राशि मकर मकर ♑
श्रवण (पद 3)
अयाना उत्तरायण
ऋतू वसंत
दिनमान / रात्रिमान 12:25:17 / 11:33:35
मध्याह्न (सौर दोपहर) 12:25:57
पंचांग तत्व 5 Core Angas
तिथि एकादशी
कृष्ण Paksha नंदा upto 06:04:02
देवता: रुद्र
अगली: द्वादशी (कृष्ण)
नक्षत्र श्रवण Pad 3
upto 18:46:05
देवता: विष्णु (पालनहार)
स्वामी: चंद्र (पृथ्वी)
अगला: धनिष्ठा
योग सिद्ध
upto 19:14:30
सफल और सिद्ध — अच्छा स्वभाव और आध्यात्मिक रुचि।
अगला: साध्य
करण बव
upto 16:43:32
अगला: बालव
वार (दिन) रविवार (रविवार)
हिंदू महीना और वर्ष Vedic Era
विक्रम संवती 2075 विरोधकृत
स्वामी: चंद्र
इस संवत्सर का व्यक्ति समाज और माता-पिता के विरुद्ध होगा और बहिष्कृत भी हो सकता है।
शक संवती 1940 विलम्बी
स्वामी: सूर्य
गुजराती संवत 2074 साधारण
कलि संवत / कलियुग 5119
पूर्णिमांत / अमांता चैत्र / फाल्गुन
प्रविष्टे (सौर दिवस) 16
लाहिड़ी अयनांश 24.132630°
शुभ समय (Shubh Kaal) Auspicious
अभिजीत मुहूर्त 12:01:06 – 12:50:47
ब्रह्म मुहूर्त 04:40:49 – 05:27:04
विजय मुहूर्त 14:30:09 – 15:19:50
गोधूलि मुहूर्त 18:38:35 – 19:01:42
अमृत काल
06:59:53 – 08:48:32
निशीथ काल (मध्यरात्रि) 00:02:15 – 00:48:30
प्रातः संध्या 05:03:57 – 06:13:18
सायं संध्या 18:38:35 – 19:47:57
अशुभ समय (Ashubh Kaal) शुभ कार्य वर्जित
राहु काल 17:05:25 – 18:38:35
यमघण्ट काल 12:25:56 – 13:59:06
गुलिका काल 15:32:15 – 17:05:25
दूर मुहूर्त
16:59:12 – 17:48:53
वर्ज्यम्
20:08:00 – 21:56:39
हवन, रुद्राभिषेक व यात्रा विचार अनुष्ठान मुहूर्त
अग्निवास (हवन/यज्ञ) पाताल में
धननाश (आर्थिक हानि)
अग्नि का वास पाताल में है। हवन के लिए त्याज्य / अशुभ।
शिववास (रुद्राभिषेक) कैलाश पर
सौख्य (सुख एवं आनंद)
भगवान शिव कैलाश पर्वत पर विराजमान हैं। रुद्राभिषेक के लिए अत्यंत शुभ फलदायी।
दिशा शूल पश्चिम
उपाय: यात्रा से पूर्व पान या घी का सेवन करें
होमाहुति ग्रह सूर्य (☉)
चंद्र निवास दक्षिणराहु वास: उत्तर
आनंददी योग गदा
हानि या डर (भय)
वर्ष का मन्त्रिमण्डल (संवत 2075) Mantri Mandala
राजा (Supreme Ruler)
बुध
मन्त्री (Prime Minister)
चंद्र
सेनाधिपति (Defense)
सूर्य
धान्याधिपति (Rabi Crops)
मंगल
सस्याधिपति (Kharif Harvest)
बुध
मेघाधिपति (Rain & Clouds)
सूर्य
धनाधिपति (Treasury & Wealth)
बुध
रसाधिपति (Liquids & Dairy)
शुक्र
दैनिक लग्न कुण्डली एवं ग्रह गोचर स्थिति

सूर्योदय कालीन आकाशीय ग्रह स्थिति एवं लग्न चक्र

सूर्योदय चक्र 31 Mar 2019
121234567891011सूमंरागु, श, केचंबु, शु
दैनिक लग्न चक्र (New Delhi, Delhi, IN के अनुसार)
ग्रह राशि अंश नक्षत्र (पद) गति
सूर्य मीनमीन 15° 53' उत्तर भाद्रपद पद 4 मार्गी (D)
चंद्र मकरमकर 17° 10' श्रवण पद 3 मार्गी (D)
मंगल वृषभवृषभ 05° 43' कृत्तिका पद 3 मार्गी (D)
बुध कुंभकुंभ 22° 15' पूर्व भाद्रपद पद 1 मार्गी (D)
गुरु धनुधनु 00° 03' मूल पद 1 मार्गी (D)
शुक्र कुंभकुंभ 10° 56' शतभिषा पद 2 मार्गी (D)
शनि धनुधनु 25° 40' पूर्वाषाढ़ा पद 4 मार्गी (D)
राहु मिथुनमिथुन 28° 43' पुनर्वसु पद 3 वक्री (R)
केतु धनुधनु 28° 43' उत्तराषाढ़ा पद 1 वक्री (R)
लग्न मीनमीन 14° 28' उत्तर भाद्रपद पद 4 मार्गी (D)
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वैदिक ज्ञान एवं मार्गदर्शन

वैदिक पंचांग के 5 मुख्य अंग (पंच-अंग)

संस्कृत शब्द पंचांग दो शब्दों से बना है: पंच (पांच) + अंग (तत्व या भाग)। अपने शुभ कार्यों व दैनिक गतिविधियों को इन खगोलीय ऊर्जाओं के साथ जोड़ना सफलता, मानसिक शांति और समृद्धि लाता है।

1. तिथि (Lunar Day)

सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12° की कोणीय दूरी को एक तिथि कहा जाता है। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) में 15-15 तिथियों में विभाजित होती हैं। तिथि कार्य की भावनात्मक ऊर्जा तय करती है।

2. नक्षत्र (Lunar Mansion)

आकाश मंडल 13°20' के 27 नक्षत्रों में विभाजित है। किसी समय विशेष पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में गोचर कर रहा होता है, वह उस समय की मानसिक वृत्ति, यात्रा, विवाह और महत्वपूर्ण कार्यों के फल को सबसे अधिक प्रभावित करता है।

3. योग (Luni-Solar Harmony)

सूर्य और चंद्रमा के निरयण देशांतर के जोड़ को 27 भागों में बांटने से 27 योग बनते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, और रवि योग जैसे शुभ योग सभी दोषों को शांत कर कार्यों में निश्चित सफलता दिलाते हैं।

4. करण (Half Tithi)

एक तिथि के आधे भाग (6° दूरी) को करण कहा जाता है। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)। करण सूक्ष्म समय-खंड होता है जो व्यापार, आर्थिक निवेश, यात्रा और निर्माण कार्यों का सटीक मुहूर्त तय करता है।

5. वार (Solar Weekday)

स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि 'वार' कहलाती है। प्रत्येक वार के अधिष्ठाता ग्रह होते हैं (रविवार-सूर्य, सोमवार-चंद्र, मंगलवार-मंगल, बुधवार-बुध, गुरुवार-गुरु, शुक्रवार-शुक्र, शनिवार-शनि)।

राहुकाल में शुभ कार्य क्यों वर्जित हैं?

प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की अवधि छाया ग्रह राहु के आधिपत्य में होती है। नया व्यवसाय शुरू करना, अनुबंध पर हस्ताक्षर, विवाह, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य राहुकाल में करने से विघ्न आने की संभावना रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दैनिक पंचांग से जुड़े सामान्य प्रश्न

हिन्दू पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ज्योतिषीय गणना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न व उत्तर।

दृक पंचांग की गणना आधुनिक खगोलीय वेधशालाओं (NASA/JPL Ephemeris) द्वारा प्रमाणित प्रत्यक्ष आकाश में ग्रहों की वास्तविक स्थिति (चित्रापक्षीय/लाहिड़ी अयनांश) पर आधारित होती है। पारंपरिक सूर्य सिद्धांत प्राचीन औसत गति सूत्रों का उपयोग करता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन शुद्ध और सटीक दृक गणित का उपयोग करता है ताकि आपको सही सूर्योदय और मुहूर्त समय मिल सके।

स्थानीय दोपहर के मध्य समय से लगभग 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद (कुल 48 मिनट) की अवधि को अभिजित मुहूर्त कहा जाता है। भगवान श्री हरि विष्णु के आशीर्वाद से युक्त यह मुहूर्त अधिकांश सूक्ष्म दोषों को नष्ट करने में समर्थ होता है और यात्रा, नए कार्य, गृह प्रवेश या व्यापार आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है (बुधवार को छोड़कर)।

वैदिक ज्योतिष में दिन की गणना स्थानीय सूर्योदय से होती है। किसी स्थान के अक्षांश (Latitude), देशांतर (Longitude) और ऊंचाई के कारण वहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर आता है, जिससे राहुकाल, चौघड़िया और तिथि समाप्ति काल भी कुछ मिनट भिन्न होते हैं।

पूर्णिमांत कैलेंडर में महीने का अंत पूर्णिमा (Full Moon Day) पर होता है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारतीय राज्यों (राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा) में प्रचलित है। अमान्त कैलेंडर में महीने का अंत अमावस्या (New Moon Day) पर होता है, जो गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मान्य है।

दिशा शूल की दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता। यदि यात्रा अति आवश्यक हो, तो वार अनुसार वैदिक उपाय करके ही निकलें: रविवार (पान या घी खाकर), सोमवार (दर्पण देखकर या दूध पीकर), मंगलवार (गुड़ या धनिया खाकर), बुधवार (तिल या गुड़ खाकर), गुरुवार (दही या पीली सरसों खाकर), शुक्रवार (दही या जौ खाकर), शनिवार (अदरक या उड़द खाकर)
स्थान अनुसार वैदिक पंचांग

प्रमुख धार्मिक तीर्थ व शहरों का दैनिक पंचांग

प्रत्येक स्थान के सटीक अक्षांश (Latitude) व देशांतर (Longitude) अनुसार स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि व शुभ मुहूर्त।

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