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मंगलवार, 30 मई 2073 का पंचांग

मंगलवार, 30 मई 2073 के लिए New Delhi, Delhi, IN, India का दैनिक पंचांग, जो Astrology Divine द्वारा तैयार किया गया है, एक गहरे ज्योतिषीय मार्गदर्शक का दर्शन है। वेदीय परंपराओं में निहित इस पंचांग में तिथि (चंद्रमा का दिन), नक्षत्र (नक्षत्र), योग और करण जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को शामिल किया गया है। New Delhi, Delhi, IN के विशेष ऊर्जा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया यह पंचांग हिन्दू परंपराओं का पालन करने वाले व्यक्तियों के लिए एक अमूल्य साधन है। शुभ और अशुभ समयों के सटीक इंजन मिलाकर, यह दैनिक पंचांग दैहिक गतिविधियों, धार्मिक कार्यों और सांस्कृतिक घटनाओं की योजना बनाने के लिए एक विश्वसनीय साथी बन जाता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन सुनिश्चित करता है कि New Delhi, Delhi, IN में मंगलवार, 30 मई 2073 को एक आध्यात्मिक और समर्थ प्रवृत्ति हो।

पंचक प्रभावीसावधानी
समाप्ति: 30 May, 04:11 PM
बाण: रोग
Disease / Illness

24 घंटे का दृश्य पंचांग टाइम-चार्ट

लाइव 10:31:34 AM
मंगलवार, 30 मई 2073 New Delhi, Delhi, IN • सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक 24 घंटे का विस्तृत चक्र
शुभ मुहूर्त अशुभ काल दिन रात
24 घंटे देखने के लिए चार्ट को दायें-बायें स्वाइप करें 🌅 24H Cycle
दिन/रात
समय (24H)
तिथि
नक्षत्र
योग
करण
काल / मुहूर्त
दिन का समय (Daytime)
रात्रि काल (Nighttime)
05:24 AM
07:14 PM
05:24 AM
6 AM
9 AM
12 PM
3 PM
6 PM
9 PM
12 AM
3 AM
नवमी (कृष्ण) तक 02:58 PM
दशमी (कृष्ण) तक 05:30 PM
पूर्व भाद्रपद तक 04:11 PM
उत्तर भाद्रपद तक 07:17 PM
विष्कंभ तक 07:14 AM
प्रीति तक 08:17 AM
गर तक 02:58 PM
विष्टि ⚠️ तक 05:30 PM
अमृत काल
दुर्मुहूर्त
यमघंट
अभिजित
गुलिक काल
विजय मुहूर्त
राहुकाल
गोधूलि मुहूर्त
दुर्मुहूर्त
निशीथ मुहूर्त
वर्ज्यम
ब्रह्म मुहूर्त
भद्रा
किसी भी खंड पर होवर / टैप करके वैदिक प्रभाव व समय देखें। मंगलवार, 30 मई 2073 | New Delhi, Delhi, IN
सूर्य एवं चंद्र चक्र ग्रीष्म Ritu
सूर्योदय 05:24:49
सूर्यास्त 19:14:28
चंद्रोदय 01:33:11
चंद्रास्त 13:31:57
सूर्य राशि वृषभ वृषभ ♉︎
रोहिणी (पद 2)
चंद्र राशि कुंभ कुंभ ♒
पूर्व भाद्रपद (पद 3)
अयाना उत्तरायण
ऋतू ग्रीष्म
दिनमान / रात्रिमान 13:49:39 / 10:10:07
मध्याह्न (सौर दोपहर) 12:19:39
पंचांग तत्व 5 Core Angas
तिथि नवमी
कृष्ण Paksha रिक्ता upto 14:58:12
देवता: नाग
अगली: दशमी (कृष्ण)
नक्षत्र पूर्व भाद्रपद Pad 3
upto 16:11:59
देवता: अज एकपाद (एक पैर वाला बकरी / तूफान देवता)
स्वामी: गुरु (वायु)
अगला: उत्तर भाद्रपद
योग विष्कंभ
upto 07:14:38
सहारा देने वाला — शत्रुओं पर विजय, संपत्ति और धन प्राप्ति।
अगला: प्रीति
करण गर
upto 14:58:12
अगला: वणिज
वार (दिन) मंगलवार (मंगलवार)
हिंदू महीना और वर्ष Vedic Era
विक्रम संवती 2130 पराभव
स्वामी: केतु
इस संवत्सर का व्यक्ति अवैध संबंध रख सकता है, धन खो सकता है और दरिद्रता झेल सकता है।
शक संवती 1995 विजय
स्वामी: बुध
गुजराती संवत 2129 विश्वावसु
कलि संवत / कलियुग 5173
पूर्णिमांत / अमांता ज्येष्ठ / वैशाख
प्रविष्टे (सौर दिवस) 15
लाहिड़ी अयनांश 24.889463°
शुभ समय (Shubh Kaal) Auspicious
अभिजीत मुहूर्त 11:51:59 – 12:47:18
ब्रह्म मुहूर्त 04:03:28 – 04:44:09
विजय मुहूर्त 14:37:55 – 15:33:14
गोधूलि मुहूर्त 19:14:28 – 19:34:48
अमृत काल
07:11:24 – 08:59:31
निशीथ काल (मध्यरात्रि) 23:59:11 – 00:39:52
प्रातः संध्या 04:23:48 – 05:24:49
सायं संध्या 19:14:28 – 20:15:29
अशुभ समय (Ashubh Kaal) शुभ कार्य वर्जित
राहु काल 15:47:03 – 17:30:45
यमघण्ट काल 08:52:13 – 10:35:56
गुलिका काल 12:19:38 – 14:03:20
दूर मुहूर्त
08:10:44 – 09:06:03
23:18:30 – 23:59:11
वर्ज्यम्
20:22:43 – 22:10:50
हवन, रुद्राभिषेक व यात्रा विचार अनुष्ठान मुहूर्त
अग्निवास (हवन/यज्ञ) पाताल में
धननाश (आर्थिक हानि)
अग्नि का वास पाताल में है। हवन के लिए त्याज्य / अशुभ।
शिववास (रुद्राभिषेक) सभा में
सन्ताप (कलेश)
भगवान शिव सभा में विराजमान हैं। रुद्राभिषेक के लिए त्याज्य / वर्जित।
दिशा शूल उत्तर
उपाय: गुड़ या साबुत धनिया खाकर प्रस्थान करें
होमाहुति ग्रह मंगल (♂)
चंद्र निवास पश्चिमराहु वास: पश्चिम
आनंददी योग काण
मानसिक परेशानी (क्लेश)
वर्ष का मन्त्रिमण्डल (संवत 2130) Mantri Mandala
राजा (Supreme Ruler)
मंगल
मन्त्री (Prime Minister)
सूर्य
सेनाधिपति (Defense)
शनि
धान्याधिपति (Rabi Crops)
चंद्र
सस्याधिपति (Kharif Harvest)
मंगल
मेघाधिपति (Rain & Clouds)
शनि
धनाधिपति (Treasury & Wealth)
मंगल
रसाधिपति (Liquids & Dairy)
गुरु
दैनिक लग्न कुण्डली एवं ग्रह गोचर स्थिति

सूर्योदय कालीन आकाशीय ग्रह स्थिति एवं लग्न चक्र

सूर्योदय चक्र 30 May 2073
234567891011121सूबु, गुराचं, केशुमं
दैनिक लग्न चक्र (New Delhi, Delhi, IN के अनुसार)
ग्रह राशि अंश नक्षत्र (पद) गति
सूर्य वृषभवृषभ 14° 20' रोहिणी पद 2 मार्गी (D)
चंद्र कुंभकुंभ 28° 00' पूर्व भाद्रपद पद 3 मार्गी (D)
मंगल मेषमेष 11° 18' अश्विनी पद 4 मार्गी (D)
बुध मिथुनमिथुन 07° 10' आर्द्रा पद 1 मार्गी (D)
गुरु मिथुनमिथुन 17° 42' आर्द्रा पद 4 मार्गी (D)
शुक्र मीनमीन 28° 51' रेवती पद 4 मार्गी (D)
शनि तुलातुला 26° 00' विशाखा पद 2 वक्री (R)
राहु सिंहसिंह 00° 20' मघा पद 1 वक्री (R)
केतु कुंभकुंभ 00° 20' धनिष्ठा पद 3 वक्री (R)
लग्न वृषभवृषभ 13° 19' रोहिणी पद 1 मार्गी (D)
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वैदिक ज्ञान एवं मार्गदर्शन

वैदिक पंचांग के 5 मुख्य अंग (पंच-अंग)

संस्कृत शब्द पंचांग दो शब्दों से बना है: पंच (पांच) + अंग (तत्व या भाग)। अपने शुभ कार्यों व दैनिक गतिविधियों को इन खगोलीय ऊर्जाओं के साथ जोड़ना सफलता, मानसिक शांति और समृद्धि लाता है।

1. तिथि (Lunar Day)

सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12° की कोणीय दूरी को एक तिथि कहा जाता है। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) में 15-15 तिथियों में विभाजित होती हैं। तिथि कार्य की भावनात्मक ऊर्जा तय करती है।

2. नक्षत्र (Lunar Mansion)

आकाश मंडल 13°20' के 27 नक्षत्रों में विभाजित है। किसी समय विशेष पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में गोचर कर रहा होता है, वह उस समय की मानसिक वृत्ति, यात्रा, विवाह और महत्वपूर्ण कार्यों के फल को सबसे अधिक प्रभावित करता है।

3. योग (Luni-Solar Harmony)

सूर्य और चंद्रमा के निरयण देशांतर के जोड़ को 27 भागों में बांटने से 27 योग बनते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, और रवि योग जैसे शुभ योग सभी दोषों को शांत कर कार्यों में निश्चित सफलता दिलाते हैं।

4. करण (Half Tithi)

एक तिथि के आधे भाग (6° दूरी) को करण कहा जाता है। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)। करण सूक्ष्म समय-खंड होता है जो व्यापार, आर्थिक निवेश, यात्रा और निर्माण कार्यों का सटीक मुहूर्त तय करता है।

5. वार (Solar Weekday)

स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि 'वार' कहलाती है। प्रत्येक वार के अधिष्ठाता ग्रह होते हैं (रविवार-सूर्य, सोमवार-चंद्र, मंगलवार-मंगल, बुधवार-बुध, गुरुवार-गुरु, शुक्रवार-शुक्र, शनिवार-शनि)।

राहुकाल में शुभ कार्य क्यों वर्जित हैं?

प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की अवधि छाया ग्रह राहु के आधिपत्य में होती है। नया व्यवसाय शुरू करना, अनुबंध पर हस्ताक्षर, विवाह, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य राहुकाल में करने से विघ्न आने की संभावना रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दैनिक पंचांग से जुड़े सामान्य प्रश्न

हिन्दू पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ज्योतिषीय गणना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न व उत्तर।

दृक पंचांग की गणना आधुनिक खगोलीय वेधशालाओं (NASA/JPL Ephemeris) द्वारा प्रमाणित प्रत्यक्ष आकाश में ग्रहों की वास्तविक स्थिति (चित्रापक्षीय/लाहिड़ी अयनांश) पर आधारित होती है। पारंपरिक सूर्य सिद्धांत प्राचीन औसत गति सूत्रों का उपयोग करता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन शुद्ध और सटीक दृक गणित का उपयोग करता है ताकि आपको सही सूर्योदय और मुहूर्त समय मिल सके।

स्थानीय दोपहर के मध्य समय से लगभग 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद (कुल 48 मिनट) की अवधि को अभिजित मुहूर्त कहा जाता है। भगवान श्री हरि विष्णु के आशीर्वाद से युक्त यह मुहूर्त अधिकांश सूक्ष्म दोषों को नष्ट करने में समर्थ होता है और यात्रा, नए कार्य, गृह प्रवेश या व्यापार आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है (बुधवार को छोड़कर)।

वैदिक ज्योतिष में दिन की गणना स्थानीय सूर्योदय से होती है। किसी स्थान के अक्षांश (Latitude), देशांतर (Longitude) और ऊंचाई के कारण वहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर आता है, जिससे राहुकाल, चौघड़िया और तिथि समाप्ति काल भी कुछ मिनट भिन्न होते हैं।

पूर्णिमांत कैलेंडर में महीने का अंत पूर्णिमा (Full Moon Day) पर होता है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारतीय राज्यों (राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा) में प्रचलित है। अमान्त कैलेंडर में महीने का अंत अमावस्या (New Moon Day) पर होता है, जो गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मान्य है।

दिशा शूल की दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता। यदि यात्रा अति आवश्यक हो, तो वार अनुसार वैदिक उपाय करके ही निकलें: रविवार (पान या घी खाकर), सोमवार (दर्पण देखकर या दूध पीकर), मंगलवार (गुड़ या धनिया खाकर), बुधवार (तिल या गुड़ खाकर), गुरुवार (दही या पीली सरसों खाकर), शुक्रवार (दही या जौ खाकर), शनिवार (अदरक या उड़द खाकर)
स्थान अनुसार वैदिक पंचांग

प्रमुख धार्मिक तीर्थ व शहरों का दैनिक पंचांग

प्रत्येक स्थान के सटीक अक्षांश (Latitude) व देशांतर (Longitude) अनुसार स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि व शुभ मुहूर्त।

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