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गुरूवार, 27 दिसंबर 2029 का पंचांग

गुरूवार, 27 दिसंबर 2029 के लिए New Delhi, Delhi, IN, India का दैनिक पंचांग, जो Astrology Divine द्वारा तैयार किया गया है, एक गहरे ज्योतिषीय मार्गदर्शक का दर्शन है। वेदीय परंपराओं में निहित इस पंचांग में तिथि (चंद्रमा का दिन), नक्षत्र (नक्षत्र), योग और करण जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को शामिल किया गया है। New Delhi, Delhi, IN के विशेष ऊर्जा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया यह पंचांग हिन्दू परंपराओं का पालन करने वाले व्यक्तियों के लिए एक अमूल्य साधन है। शुभ और अशुभ समयों के सटीक इंजन मिलाकर, यह दैनिक पंचांग दैहिक गतिविधियों, धार्मिक कार्यों और सांस्कृतिक घटनाओं की योजना बनाने के लिए एक विश्वसनीय साथी बन जाता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन सुनिश्चित करता है कि New Delhi, Delhi, IN में गुरूवार, 27 दिसंबर 2029 को एक आध्यात्मिक और समर्थ प्रवृत्ति हो।

आज का पर्व और व्रत 1 सूचीबद्ध
मंडला पूजा
भद्रा काल (पाताल लोक)
समाप्ति: 04:54 PM
बाण: रोग
Disease / Illness

24 घंटे का दृश्य पंचांग टाइम-चार्ट

लाइव 10:32:58 AM
गुरुवार, 27 दिसंबर 2029 New Delhi, Delhi, IN • सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक 24 घंटे का विस्तृत चक्र
शुभ मुहूर्त अशुभ काल दिन रात
24 घंटे देखने के लिए चार्ट को दायें-बायें स्वाइप करें 🌅 24H Cycle
दिन/रात
समय (24H)
तिथि
नक्षत्र
योग
करण
काल / मुहूर्त
दिन का समय (Daytime)
रात्रि काल (Nighttime)
07:12 AM
05:32 PM
07:13 AM
9 AM
12 PM
3 PM
6 PM
9 PM
12 AM
3 AM
6 AM
सप्तमी (कृष्ण) तक 04:19 AM
अष्टमी (कृष्ण) तक 02:31 AM
पूर्वा फाल्गुनी तक 11:32 AM
उत्तरा फाल्गुनी तक 10:44 AM
आयुष्मान तक 02:34 PM
सौभाग्य तक 12:07 PM
विष्टि ⚠️ तक 04:54 PM
बालव तक 03:20 PM
यमघंट
भद्रा
गुलिक काल
दुर्मुहूर्त
अभिजित
राहुकाल
विजय मुहूर्त
दुर्मुहूर्त
गोधूलि मुहूर्त
वर्ज्यम
निशीथ मुहूर्त
अमृत काल
ब्रह्म मुहूर्त
किसी भी खंड पर होवर / टैप करके वैदिक प्रभाव व समय देखें। गुरुवार, 27 दिसंबर 2029 | New Delhi, Delhi, IN
सूर्य एवं चंद्र चक्र हेमंत Ritu
सूर्योदय 07:12:53
सूर्यास्त 17:32:56
चंद्रोदय 23:49:11
चंद्रास्त 11:12:14
सूर्य राशि धनु धनु ♐
मूल (पद 4)
चंद्र राशि सिंह सिंह ♌︎
पूर्वा फाल्गुनी (पद 4)
अयाना दक्षिणायन
ऋतू हेमंत / शिशिर
दिनमान / रात्रिमान 10:20:03 / 13:40:19
मध्याह्न (सौर दोपहर) 12:22:55
पंचांग तत्व 5 Core Angas
तिथि सप्तमी
कृष्ण Paksha भद्रा upto 04:19:10
देवता: इंद्र
अगली: अष्टमी (कृष्ण)
नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी Pad 4
upto 11:32:58
देवता: भग (भाग्य और समृद्धि के देवता)
स्वामी: शुक्र (अग्नि)
अगला: उत्तरा फाल्गुनी
योग आयुष्मान
upto 14:34:49
दीर्घायु — अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु।
अगला: सौभाग्य
करण विष्टि
upto 16:54:22
अगला: बव
वार (दिन) गुरूवार (गुरुवार)
हिंदू महीना और वर्ष Vedic Era
विक्रम संवती 2086 दुंदुभि
स्वामी: बुध
इस वर्ष जन्मे व्यक्ति दैनिक कार्यों में उत्साही रहेंगे।
शक संवती 1951 सौम्य
स्वामी: शिव
गुजराती संवत 2086 दुंदुभि
कलि संवत / कलियुग 5129
पूर्णिमांत / अमांता पौष / मार्गशीर्ष
प्रविष्टे (सौर दिवस) 12
लाहिड़ी अयनांश 24.282728°
शुभ समय (Shubh Kaal) Auspicious
अभिजीत मुहूर्त 12:02:14 – 12:43:35
ब्रह्म मुहूर्त 05:23:30 – 06:18:12
विजय मुहूर्त 14:06:15 – 14:47:35
गोधूलि मुहूर्त 17:32:56 – 18:00:17
अमृत काल
05:17:28 – 06:51:20
निशीथ काल (मध्यरात्रि) 23:55:45 – 00:50:26
प्रातः संध्या 05:50:51 – 07:12:53
सायं संध्या 17:32:56 – 18:54:58
आज के शुभ योग:
रवि योग सूर्य और चंद्रमा द्वारा निर्मित एक शक्तिशाली योग। यह अशुभ प्रभावों को नष्ट करने के लिए जाना जाता है और नई शुरुआत के लिए उत्कृष्ट है।
अशुभ समय (Ashubh Kaal) शुभ कार्य वर्जित
राहु काल 13:40:24 – 14:57:55
यमघण्ट काल 07:12:53 – 08:30:23
गुलिका काल 09:47:53 – 11:05:24
दूर मुहूर्त
10:39:34 – 11:20:54
14:47:35 – 15:28:55
वर्ज्यम्
19:54:14 – 21:28:06
भद्रा काल 05:29:33 – 16:54:22
हवन, रुद्राभिषेक व यात्रा विचार अनुष्ठान मुहूर्त
अग्निवास (हवन/यज्ञ) पाताल में
धननाश (आर्थिक हानि)
अग्नि का वास पाताल में है। हवन के लिए त्याज्य / अशुभ।
शिववास (रुद्राभिषेक) श्मशान में
मृत्यु कष्ट (अत्यंत कष्ट)
भगवान शिव श्मशान में लीन हैं। रुद्राभिषेक के लिए त्याज्य / वर्जित।
दिशा शूल दक्षिण
उपाय: दही या पीली सरसों का सेवन करें
होमाहुति ग्रह गुरु (♃)
चंद्र निवास पूर्वराहु वास: दक्षिण
आनंददी योग गदा
हानि या डर (भय)
वर्ष का मन्त्रिमण्डल (संवत 2086) Mantri Mandala
राजा (Supreme Ruler)
सूर्य
मन्त्री (Prime Minister)
शुक्र
सेनाधिपति (Defense)
गुरु
धान्याधिपति (Rabi Crops)
शनि
सस्याधिपति (Kharif Harvest)
सूर्य
मेघाधिपति (Rain & Clouds)
गुरु
धनाधिपति (Treasury & Wealth)
सूर्य
रसाधिपति (Liquids & Dairy)
मंगल
दैनिक लग्न कुण्डली एवं ग्रह गोचर स्थिति

सूर्योदय कालीन आकाशीय ग्रह स्थिति एवं लग्न चक्र

सूर्योदय चक्र 27 Dec 2029
910111212345678सू, बु, शु, रामंकेचंगु
दैनिक लग्न चक्र (New Delhi, Delhi, IN के अनुसार)
ग्रह राशि अंश नक्षत्र (पद) गति
सूर्य धनुधनु 11° 17' मूल पद 4 मार्गी (D)
चंद्र सिंहसिंह 24° 12' पूर्वा फाल्गुनी पद 4 मार्गी (D)
मंगल मकरमकर 16° 33' श्रवण पद 2 मार्गी (D)
बुध धनुधनु 21° 11' पूर्वाषाढ़ा पद 3 वक्री (R)
गुरु तुलातुला 25° 24' विशाखा पद 2 मार्गी (D)
शुक्र धनुधनु 27° 39' उत्तराषाढ़ा पद 1 वक्री (R)
शनि मेषमेष 24° 18' भरणी पद 4 वक्री (R)
राहु धनुधनु 00° 47' मूल पद 1 वक्री (R)
केतु मिथुनमिथुन 00° 47' मृगशिरा पद 3 वक्री (R)
लग्न धनुधनु 10° 20' मूल पद 4 मार्गी (D)
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वैदिक ज्ञान एवं मार्गदर्शन

वैदिक पंचांग के 5 मुख्य अंग (पंच-अंग)

संस्कृत शब्द पंचांग दो शब्दों से बना है: पंच (पांच) + अंग (तत्व या भाग)। अपने शुभ कार्यों व दैनिक गतिविधियों को इन खगोलीय ऊर्जाओं के साथ जोड़ना सफलता, मानसिक शांति और समृद्धि लाता है।

1. तिथि (Lunar Day)

सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12° की कोणीय दूरी को एक तिथि कहा जाता है। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) में 15-15 तिथियों में विभाजित होती हैं। तिथि कार्य की भावनात्मक ऊर्जा तय करती है।

2. नक्षत्र (Lunar Mansion)

आकाश मंडल 13°20' के 27 नक्षत्रों में विभाजित है। किसी समय विशेष पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में गोचर कर रहा होता है, वह उस समय की मानसिक वृत्ति, यात्रा, विवाह और महत्वपूर्ण कार्यों के फल को सबसे अधिक प्रभावित करता है।

3. योग (Luni-Solar Harmony)

सूर्य और चंद्रमा के निरयण देशांतर के जोड़ को 27 भागों में बांटने से 27 योग बनते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, और रवि योग जैसे शुभ योग सभी दोषों को शांत कर कार्यों में निश्चित सफलता दिलाते हैं।

4. करण (Half Tithi)

एक तिथि के आधे भाग (6° दूरी) को करण कहा जाता है। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)। करण सूक्ष्म समय-खंड होता है जो व्यापार, आर्थिक निवेश, यात्रा और निर्माण कार्यों का सटीक मुहूर्त तय करता है।

5. वार (Solar Weekday)

स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि 'वार' कहलाती है। प्रत्येक वार के अधिष्ठाता ग्रह होते हैं (रविवार-सूर्य, सोमवार-चंद्र, मंगलवार-मंगल, बुधवार-बुध, गुरुवार-गुरु, शुक्रवार-शुक्र, शनिवार-शनि)।

राहुकाल में शुभ कार्य क्यों वर्जित हैं?

प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की अवधि छाया ग्रह राहु के आधिपत्य में होती है। नया व्यवसाय शुरू करना, अनुबंध पर हस्ताक्षर, विवाह, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य राहुकाल में करने से विघ्न आने की संभावना रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दैनिक पंचांग से जुड़े सामान्य प्रश्न

हिन्दू पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ज्योतिषीय गणना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न व उत्तर।

दृक पंचांग की गणना आधुनिक खगोलीय वेधशालाओं (NASA/JPL Ephemeris) द्वारा प्रमाणित प्रत्यक्ष आकाश में ग्रहों की वास्तविक स्थिति (चित्रापक्षीय/लाहिड़ी अयनांश) पर आधारित होती है। पारंपरिक सूर्य सिद्धांत प्राचीन औसत गति सूत्रों का उपयोग करता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन शुद्ध और सटीक दृक गणित का उपयोग करता है ताकि आपको सही सूर्योदय और मुहूर्त समय मिल सके।

स्थानीय दोपहर के मध्य समय से लगभग 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद (कुल 48 मिनट) की अवधि को अभिजित मुहूर्त कहा जाता है। भगवान श्री हरि विष्णु के आशीर्वाद से युक्त यह मुहूर्त अधिकांश सूक्ष्म दोषों को नष्ट करने में समर्थ होता है और यात्रा, नए कार्य, गृह प्रवेश या व्यापार आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है (बुधवार को छोड़कर)।

वैदिक ज्योतिष में दिन की गणना स्थानीय सूर्योदय से होती है। किसी स्थान के अक्षांश (Latitude), देशांतर (Longitude) और ऊंचाई के कारण वहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर आता है, जिससे राहुकाल, चौघड़िया और तिथि समाप्ति काल भी कुछ मिनट भिन्न होते हैं।

पूर्णिमांत कैलेंडर में महीने का अंत पूर्णिमा (Full Moon Day) पर होता है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारतीय राज्यों (राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा) में प्रचलित है। अमान्त कैलेंडर में महीने का अंत अमावस्या (New Moon Day) पर होता है, जो गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मान्य है।

दिशा शूल की दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता। यदि यात्रा अति आवश्यक हो, तो वार अनुसार वैदिक उपाय करके ही निकलें: रविवार (पान या घी खाकर), सोमवार (दर्पण देखकर या दूध पीकर), मंगलवार (गुड़ या धनिया खाकर), बुधवार (तिल या गुड़ खाकर), गुरुवार (दही या पीली सरसों खाकर), शुक्रवार (दही या जौ खाकर), शनिवार (अदरक या उड़द खाकर)
स्थान अनुसार वैदिक पंचांग

प्रमुख धार्मिक तीर्थ व शहरों का दैनिक पंचांग

प्रत्येक स्थान के सटीक अक्षांश (Latitude) व देशांतर (Longitude) अनुसार स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि व शुभ मुहूर्त।

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