गुरूवार, 18 मई 2028 के लिए New Delhi, Delhi, IN, India का दैनिक पंचांग, जो Astrology Divine द्वारा तैयार किया गया है, एक गहरे ज्योतिषीय मार्गदर्शक का दर्शन है। वेदीय परंपराओं में निहित इस पंचांग में तिथि (चंद्रमा का दिन), नक्षत्र (नक्षत्र), योग और करण जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को शामिल किया गया है। New Delhi, Delhi, IN के विशेष ऊर्जा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया यह पंचांग हिन्दू परंपराओं का पालन करने वाले व्यक्तियों के लिए एक अमूल्य साधन है। शुभ और अशुभ समयों के सटीक इंजन मिलाकर, यह दैनिक पंचांग दैहिक गतिविधियों, धार्मिक कार्यों और सांस्कृतिक घटनाओं की योजना बनाने के लिए एक विश्वसनीय साथी बन जाता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन सुनिश्चित करता है कि New Delhi, Delhi, IN में गुरूवार, 18 मई 2028 को एक आध्यात्मिक और समर्थ प्रवृत्ति हो।
| सूर्य राशि | वृषभ |
| चंद्र राशि | कुंभ |
| अयाना | Dakshinayana |
| ऋतू | Grishma |
| तिथि | नवमी कृष्ण upto 07:55:51 |
| नक्षत्र | पूर्व भाद्रपद upto 08:00:58 |
| योग | वैधृति upto 17:33:36 |
| करण | गर upto 07:55:51 |
| Vaar (Day) | गुरूवार (Thursday) |
| विक्रम संवती | 2085 दुर्मति |
| शक संवती | 1950 कीलक |
| पक्ष | कृष्ण Paksha |
| पूर्णिमांत Month | ज्येष्ठ |
| अमांता Month | आषाढ़ |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:54:25 – 12:42:25 |
| अमृत काल | 23:01:33 – 00:49:26 |
| Brahma Muhurta | 03:53:21 – 04:41:21 |
| राहु काल | 14:00:41 – 15:42:57 |
| यमघण्ट काल | 05:29:21 – 07:11:37 |
| गुलिका काल | 08:53:53 – 10:36:09 |
| दूर मुहूर्त | 10:02:03 – 10:56:36 15:29:18 – 16:23:51 |
| वर्ज्यम् | 12:14:14 – 14:02:07 |
| दिशा शूल | दक्षिण |
| Travel Remedy | Consume Curd / Yellow mustard seeds |
| चंद्र निवास | पश्चिम |
| आनंददी योग | मुद्गर |
संस्कृत शब्द पंचांग दो शब्दों से बना है: पंच (पांच) + अंग (तत्व या भाग)। अपने शुभ कार्यों व दैनिक गतिविधियों को इन खगोलीय ऊर्जाओं के साथ जोड़ना सफलता, मानसिक शांति और समृद्धि लाता है।
सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12° की कोणीय दूरी को एक तिथि कहा जाता है। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) में 15-15 तिथियों में विभाजित होती हैं। तिथि कार्य की भावनात्मक ऊर्जा तय करती है।
आकाश मंडल 13°20' के 27 नक्षत्रों में विभाजित है। किसी समय विशेष पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में गोचर कर रहा होता है, वह उस समय की मानसिक वृत्ति, यात्रा, विवाह और महत्वपूर्ण कार्यों के फल को सबसे अधिक प्रभावित करता है।
सूर्य और चंद्रमा के निरयण देशांतर के जोड़ को 27 भागों में बांटने से 27 योग बनते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, और रवि योग जैसे शुभ योग सभी दोषों को शांत कर कार्यों में निश्चित सफलता दिलाते हैं।
एक तिथि के आधे भाग (6° दूरी) को करण कहा जाता है। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)। करण सूक्ष्म समय-खंड होता है जो व्यापार, आर्थिक निवेश, यात्रा और निर्माण कार्यों का सटीक मुहूर्त तय करता है।
स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि 'वार' कहलाती है। प्रत्येक वार के अधिष्ठाता ग्रह होते हैं (रविवार-सूर्य, सोमवार-चंद्र, मंगलवार-मंगल, बुधवार-बुध, गुरुवार-गुरु, शुक्रवार-शुक्र, शनिवार-शनि)।
प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की अवधि छाया ग्रह राहु के आधिपत्य में होती है। नया व्यवसाय शुरू करना, अनुबंध पर हस्ताक्षर, विवाह, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य राहुकाल में करने से विघ्न आने की संभावना रहती है।
हिन्दू पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ज्योतिषीय गणना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न व उत्तर।