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मंगलवार, 18 फरवरी 2059 का पंचांग

मंगलवार, 18 फरवरी 2059 के लिए New Delhi, Delhi, IN, India का दैनिक पंचांग, जो Astrology Divine द्वारा तैयार किया गया है, एक गहरे ज्योतिषीय मार्गदर्शक का दर्शन है। वेदीय परंपराओं में निहित इस पंचांग में तिथि (चंद्रमा का दिन), नक्षत्र (नक्षत्र), योग और करण जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को शामिल किया गया है। New Delhi, Delhi, IN के विशेष ऊर्जा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया यह पंचांग हिन्दू परंपराओं का पालन करने वाले व्यक्तियों के लिए एक अमूल्य साधन है। शुभ और अशुभ समयों के सटीक इंजन मिलाकर, यह दैनिक पंचांग दैहिक गतिविधियों, धार्मिक कार्यों और सांस्कृतिक घटनाओं की योजना बनाने के लिए एक विश्वसनीय साथी बन जाता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन सुनिश्चित करता है कि New Delhi, Delhi, IN में मंगलवार, 18 फरवरी 2059 को एक आध्यात्मिक और समर्थ प्रवृत्ति हो।

आज का पर्व और व्रत 2 Listed
रथ सप्तमीनर्मदा जयंती

24 घंटे का दृश्य पंचांग टाइम-चार्ट

लाइव 12:54:15 AM
मंगलवार, 18 फ़रवरी 2059 New Delhi, Delhi, IN • सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक 24 घंटे का विस्तृत चक्र
शुभ मुहूर्त अशुभ काल दिन रात
24 घंटे देखने के लिए चार्ट को दायें-बायें स्वाइप करें 🌅 24H Cycle
दिन/रात
समय (24H)
तिथि
नक्षत्र
योग
करण
काल / मुहूर्त
दिन का समय (Daytime)
रात्रि काल (Nighttime)
06:57 AM
06:13 PM
06:56 AM
9 AM
12 PM
3 PM
6 PM
9 PM
12 AM
3 AM
6 AM
सप्तमी (शुक्ल) तक 01:12 AM
अष्टमी (शुक्ल) तक 01:22 AM
भरणी तक 08:13 PM
कृत्तिका तक 08:47 PM
ब्रह्म तक 10:32 PM
इंद्र तक 09:25 PM
गर तक 01:40 PM
विष्टि ⚠️ तक 01:24 PM
वर्ज्यम
दुर्मुहूर्त
यमघंट
अभिजित
गुलिक काल
राहुकाल
अमृत काल
दुर्मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त
किसी भी खंड पर होवर / टैप करके वैदिक प्रभाव व समय देखें। मंगलवार, 18 फ़रवरी 2059 | New Delhi, Delhi, IN
Sun & Moon Timings Grishma Ritu
सूर्योदय 06:57:28
सूर्यास्त 18:13:36
चंद्रोदय 10:50:50
चंद्रास्त 05:30:00
सूर्य राशि कुंभकुंभ
चंद्र राशि मेषमेष
अयाना Dakshinayana
ऋतू Grishma
पंचांग तत्व 5 Core Angas
तिथि सप्तमी
शुक्ल upto 01:12:55
नक्षत्र भरणी
upto 20:13:03
योग ब्रह्म
upto 22:32:28
करण गर
upto 13:40:08
Vaar (Day) मंगलवार (Tuesday)
हिंदू महीना और वर्ष Vedic Era
विक्रम संवती 2115 खर
शक संवती 1980 बहुधान्य
पक्ष शुक्ल Paksha
पूर्णिमांत Month फाल्गुन
अमांता Month फाल्गुन
शुभ समय (Shubh Kaal) Auspicious
अभिजीत मुहूर्त 12:11:32 – 12:59:32
अमृत काल
15:28:12 – 17:03:09
Brahma Muhurta 05:21:28 – 06:09:28
Active Auspicious Yogas Today:
द्विपुष्कर योग इस योग के दौरान होने वाली कोई भी घटना (अच्छी या बुरी) दो बार दोहराए जाने की संभावना होती है। शुभ कार्यों के लिए अनुशंसित।
अशुभ समय (Ashubh Kaal) Avoid New Tasks
राहु काल 15:24:34 – 16:49:05
यमघण्ट काल 09:46:30 – 11:11:01
गुलिका काल 12:35:32 – 14:00:03
दूर मुहूर्त
09:12:41 – 09:57:46
23:18:47 – 00:09:39
वर्ज्यम्
05:58:31 – 07:33:28
शूल और निवास Travel & Directions
दिशा शूल उत्तर
Travel Remedy Consume Jaggery or Coriander seeds
चंद्र निवास पूर्व
आनंददी योग मूसल
दैनिक लग्न कुण्डली एवं ग्रह गोचर स्थिति

सूर्योदय कालीन आकाशीय ग्रह स्थिति एवं लग्न चक्र

सूर्योदय चक्र 18 Feb 2059
111212345678910सूबुगुचंरामंकेशु
दैनिक लग्न चक्र (New Delhi, Delhi, IN के अनुसार)
ग्रह राशि अंश नक्षत्र (पद) गति
सूर्य कुंभकुंभ 04° 42' धनिष्ठा पद 4 मार्गी (D)
चंद्र मेषमेष 19° 13' भरणी पद 2 मार्गी (D)
मंगल सिंहसिंह 17° 28' पूर्वा फाल्गुनी पद 2 वक्री (R)
बुध कुंभकुंभ 22° 48' पूर्व भाद्रपद पद 1 मार्गी (D)
गुरु मीनमीन 27° 12' रेवती पद 4 मार्गी (D)
शुक्र धनुधनु 24° 00' पूर्वाषाढ़ा पद 4 मार्गी (D)
शनि मेषमेष 19° 08' भरणी पद 2 मार्गी (D)
राहु वृषभवृषभ 06° 41' कृत्तिका पद 4 वक्री (R)
केतु वृश्चिकवृश्चिक 06° 41' अनुराधा पद 2 वक्री (R)
लग्न कुंभकुंभ 03° 25' धनिष्ठा पद 4 मार्गी (D)
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वैदिक ज्ञान एवं मार्गदर्शन

वैदिक पंचांग के 5 मुख्य अंग (पंच-अंग)

संस्कृत शब्द पंचांग दो शब्दों से बना है: पंच (पांच) + अंग (तत्व या भाग)। अपने शुभ कार्यों व दैनिक गतिविधियों को इन खगोलीय ऊर्जाओं के साथ जोड़ना सफलता, मानसिक शांति और समृद्धि लाता है।

1. तिथि (Lunar Day)

सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12° की कोणीय दूरी को एक तिथि कहा जाता है। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) में 15-15 तिथियों में विभाजित होती हैं। तिथि कार्य की भावनात्मक ऊर्जा तय करती है।

2. नक्षत्र (Lunar Mansion)

आकाश मंडल 13°20' के 27 नक्षत्रों में विभाजित है। किसी समय विशेष पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में गोचर कर रहा होता है, वह उस समय की मानसिक वृत्ति, यात्रा, विवाह और महत्वपूर्ण कार्यों के फल को सबसे अधिक प्रभावित करता है।

3. योग (Luni-Solar Harmony)

सूर्य और चंद्रमा के निरयण देशांतर के जोड़ को 27 भागों में बांटने से 27 योग बनते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, और रवि योग जैसे शुभ योग सभी दोषों को शांत कर कार्यों में निश्चित सफलता दिलाते हैं।

4. करण (Half Tithi)

एक तिथि के आधे भाग (6° दूरी) को करण कहा जाता है। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)। करण सूक्ष्म समय-खंड होता है जो व्यापार, आर्थिक निवेश, यात्रा और निर्माण कार्यों का सटीक मुहूर्त तय करता है।

5. वार (Solar Weekday)

स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि 'वार' कहलाती है। प्रत्येक वार के अधिष्ठाता ग्रह होते हैं (रविवार-सूर्य, सोमवार-चंद्र, मंगलवार-मंगल, बुधवार-बुध, गुरुवार-गुरु, शुक्रवार-शुक्र, शनिवार-शनि)।

राहुकाल में शुभ कार्य क्यों वर्जित हैं?

प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की अवधि छाया ग्रह राहु के आधिपत्य में होती है। नया व्यवसाय शुरू करना, अनुबंध पर हस्ताक्षर, विवाह, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य राहुकाल में करने से विघ्न आने की संभावना रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दैनिक पंचांग से जुड़े सामान्य प्रश्न

हिन्दू पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ज्योतिषीय गणना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न व उत्तर।

दृक पंचांग की गणना आधुनिक खगोलीय वेधशालाओं (NASA/JPL Ephemeris) द्वारा प्रमाणित प्रत्यक्ष आकाश में ग्रहों की वास्तविक स्थिति (चित्रापक्षीय/लाहिड़ी अयनांश) पर आधारित होती है। पारंपरिक सूर्य सिद्धांत प्राचीन औसत गति सूत्रों का उपयोग करता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन शुद्ध और सटीक दृक गणित का उपयोग करता है ताकि आपको सही सूर्योदय और मुहूर्त समय मिल सके।

स्थानीय दोपहर के मध्य समय से लगभग 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद (कुल 48 मिनट) की अवधि को अभिजित मुहूर्त कहा जाता है। भगवान श्री हरि विष्णु के आशीर्वाद से युक्त यह मुहूर्त अधिकांश सूक्ष्म दोषों को नष्ट करने में समर्थ होता है और यात्रा, नए कार्य, गृह प्रवेश या व्यापार आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है (बुधवार को छोड़कर)।

वैदिक ज्योतिष में दिन की गणना स्थानीय सूर्योदय से होती है। किसी स्थान के अक्षांश (Latitude), देशांतर (Longitude) और ऊंचाई के कारण वहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर आता है, जिससे राहुकाल, चौघड़िया और तिथि समाप्ति काल भी कुछ मिनट भिन्न होते हैं।

पूर्णिमांत कैलेंडर में महीने का अंत पूर्णिमा (Full Moon Day) पर होता है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारतीय राज्यों (राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा) में प्रचलित है। अमान्त कैलेंडर में महीने का अंत अमावस्या (New Moon Day) पर होता है, जो गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मान्य है।

दिशा शूल की दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता। यदि यात्रा अति आवश्यक हो, तो वार अनुसार वैदिक उपाय करके ही निकलें: रविवार (पान या घी खाकर), सोमवार (दर्पण देखकर या दूध पीकर), मंगलवार (गुड़ या धनिया खाकर), बुधवार (तिल या गुड़ खाकर), गुरुवार (दही या पीली सरसों खाकर), शुक्रवार (दही या जौ खाकर), शनिवार (अदरक या उड़द खाकर)
स्थान अनुसार वैदिक पंचांग

प्रमुख धार्मिक तीर्थ व शहरों का दैनिक पंचांग

प्रत्येक स्थान के सटीक अक्षांश (Latitude) व देशांतर (Longitude) अनुसार स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि व शुभ मुहूर्त।

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