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रविवार, 01 दिसंबर 1991 का पंचांग

रविवार, 01 दिसंबर 1991 के लिए New Delhi, Delhi, IN, India का दैनिक पंचांग, जो Astrology Divine द्वारा तैयार किया गया है, एक गहरे ज्योतिषीय मार्गदर्शक का दर्शन है। वेदीय परंपराओं में निहित इस पंचांग में तिथि (चंद्रमा का दिन), नक्षत्र (नक्षत्र), योग और करण जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को शामिल किया गया है। New Delhi, Delhi, IN के विशेष ऊर्जा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया यह पंचांग हिन्दू परंपराओं का पालन करने वाले व्यक्तियों के लिए एक अमूल्य साधन है। शुभ और अशुभ समयों के सटीक इंजन मिलाकर, यह दैनिक पंचांग दैहिक गतिविधियों, धार्मिक कार्यों और सांस्कृतिक घटनाओं की योजना बनाने के लिए एक विश्वसनीय साथी बन जाता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन सुनिश्चित करता है कि New Delhi, Delhi, IN में रविवार, 01 दिसंबर 1991 को एक आध्यात्मिक और समर्थ प्रवृत्ति हो।

आज का पर्व और व्रत 1 सूचीबद्ध
बाण: चोर
Theft / Loss

24 घंटे का दृश्य पंचांग टाइम-चार्ट

लाइव 10:33:08 AM
रविवार, 01 दिसंबर 1991 New Delhi, Delhi, IN • सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक 24 घंटे का विस्तृत चक्र
शुभ मुहूर्त अशुभ काल दिन रात
24 घंटे देखने के लिए चार्ट को दायें-बायें स्वाइप करें 🌅 24H Cycle
दिन/रात
समय (24H)
तिथि
नक्षत्र
योग
करण
काल / मुहूर्त
दिन का समय (Daytime)
रात्रि काल (Nighttime)
06:56 AM
05:24 PM
06:57 AM
9 AM
12 PM
3 PM
6 PM
9 PM
12 AM
3 AM
6 AM
एकादशी (कृष्ण) तक 05:45 AM
द्वादशी (कृष्ण) तक 05:56 AM
हस्त तक 10:06 PM
चित्रा तक 10:44 PM
आयुष्मान तक 12:31 AM
सौभाग्य तक 11:24 PM
बव तक 05:59 PM
कौलव तक 05:57 PM
वर्ज्यम
अभिजित
यमघंट
विजय मुहूर्त
गुलिक काल
दुर्मुहूर्त
अमृत काल
राहुकाल
गोधूलि मुहूर्त
निशीथ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त
वर्ज्यम
किसी भी खंड पर होवर / टैप करके वैदिक प्रभाव व समय देखें। रविवार, 01 दिसंबर 1991 | New Delhi, Delhi, IN
सूर्य एवं चंद्र चक्र हेमंत Ritu
सूर्योदय 06:56:17
सूर्यास्त 17:24:36
चंद्रोदय 02:15:03
चंद्रास्त 13:58:42
सूर्य राशि वृश्चिक वृश्चिक ♏
अनुराधा (पद 4)
चंद्र राशि कन्या कन्या ♍︎
हस्त (पद 2)
अयाना दक्षिणायन
ऋतू हेमंत
दिनमान / रात्रिमान 10:28:19 / 13:32:28
मध्याह्न (सौर दोपहर) 12:10:27
पंचांग तत्व 5 Core Angas
तिथि एकादशी
कृष्ण Paksha नंदा upto 05:45:08
देवता: रुद्र
अगली: द्वादशी (कृष्ण)
नक्षत्र हस्त Pad 2
upto 22:06:31
देवता: सवितृ (सौर देवता / सृजनात्मकता के देवता)
स्वामी: चंद्र (पृथ्वी)
अगला: चित्रा
योग आयुष्मान
upto 00:31:11
दीर्घायु — अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु।
अगला: सौभाग्य
करण बव
upto 17:59:30
अगला: बालव
वार (दिन) रविवार (रविवार)
हिंदू महीना और वर्ष Vedic Era
विक्रम संवती 2048 तारण
स्वामी: शुक्र
इस वर्ष जन्मे व्यक्ति का मन चंचल होगा। उनके दुष्कर्म से दुर्नाम हो सकता है।
शक संवती 1913 प्रजोत्पति
स्वामी: चंद्र
गुजराती संवत 2048 तारण
कलि संवत / कलियुग 5091
पूर्णिमांत / अमांता मार्गशीर्ष / कार्तिक
प्रविष्टे (सौर दिवस) 15
लाहिड़ी अयनांश 23.750840°
शुभ समय (Shubh Kaal) Auspicious
अभिजीत मुहूर्त 11:49:30 – 12:31:23
ब्रह्म मुहूर्त 05:07:57 – 06:02:07
विजय मुहूर्त 13:55:10 – 14:37:03
गोधूलि मुहूर्त 17:24:36 – 17:51:41
अमृत काल
16:04:29 – 17:41:02
निशीथ काल (मध्यरात्रि) 23:43:45 – 00:37:55
प्रातः संध्या 05:35:02 – 06:56:17
सायं संध्या 17:24:36 – 18:45:51
आज के शुभ योग:
अमृत सिद्धि योग एक अत्यंत शुभ योग। इस समय शुरू किए गए कार्य फलदायी और लंबे समय तक चलने वाले माने जाते हैं।
सर्वार्थ सिद्धि योग एक ऐसा योग जो सभी (सर्व) कार्यों में सफलता (सिद्धि) प्रदान करता है। अधिकांश नए कार्यों को शुरू करने के लिए शुभ।
अशुभ समय (Ashubh Kaal) शुभ कार्य वर्जित
राहु काल 16:06:03 – 17:24:36
यमघण्ट काल 12:10:26 – 13:28:58
गुलिका काल 14:47:31 – 16:06:03
दूर मुहूर्त
16:00:49 – 16:42:42
वर्ज्यम्
06:25:13 – 08:01:46
हवन, रुद्राभिषेक व यात्रा विचार अनुष्ठान मुहूर्त
अग्निवास (हवन/यज्ञ) पाताल में
धननाश (आर्थिक हानि)
अग्नि का वास पाताल में है। हवन के लिए त्याज्य / अशुभ।
शिववास (रुद्राभिषेक) कैलाश पर
सौख्य (सुख एवं आनंद)
भगवान शिव कैलाश पर्वत पर विराजमान हैं। रुद्राभिषेक के लिए अत्यंत शुभ फलदायी।
दिशा शूल पश्चिम
उपाय: यात्रा से पूर्व पान या घी का सेवन करें
होमाहुति ग्रह सूर्य (☉)
चंद्र निवास दक्षिणराहु वास: उत्तर
आनंददी योग मानस
शुभ फल (सौभाग्य)
वर्ष का मन्त्रिमण्डल (संवत 2048) Mantri Mandala
राजा (Supreme Ruler)
गुरु
मन्त्री (Prime Minister)
मंगल
सेनाधिपति (Defense)
चंद्र
धान्याधिपति (Rabi Crops)
बुध
सस्याधिपति (Kharif Harvest)
गुरु
मेघाधिपति (Rain & Clouds)
चंद्र
धनाधिपति (Treasury & Wealth)
गुरु
रसाधिपति (Liquids & Dairy)
शनि
दैनिक लग्न कुण्डली एवं ग्रह गोचर स्थिति

सूर्योदय कालीन आकाशीय ग्रह स्थिति एवं लग्न चक्र

सूर्योदय चक्र 01 Dec 1991
891011121234567सू, मं, बुराकेगुचंशु
दैनिक लग्न चक्र (New Delhi, Delhi, IN के अनुसार)
ग्रह राशि अंश नक्षत्र (पद) गति
सूर्य वृश्चिकवृश्चिक 14° 35' अनुराधा पद 4 मार्गी (D)
चंद्र कन्याकन्या 14° 57' हस्त पद 2 मार्गी (D)
मंगल वृश्चिकवृश्चिक 07° 38' अनुराधा पद 2 मार्गी (D)
बुध वृश्चिकवृश्चिक 29° 58' ज्येष्ठा पद 4 वक्री (R)
गुरु सिंहसिंह 19° 29' पूर्वा फाल्गुनी पद 2 मार्गी (D)
शुक्र तुलातुला 00° 12' चित्रा पद 3 मार्गी (D)
शनि मकरमकर 09° 01' उत्तराषाढ़ा पद 4 मार्गी (D)
राहु धनुधनु 17° 41' पूर्वाषाढ़ा पद 2 वक्री (R)
केतु मिथुनमिथुन 17° 41' आर्द्रा पद 4 वक्री (R)
लग्न वृश्चिकवृश्चिक 13° 41' अनुराधा पद 4 मार्गी (D)
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वैदिक ज्ञान एवं मार्गदर्शन

वैदिक पंचांग के 5 मुख्य अंग (पंच-अंग)

संस्कृत शब्द पंचांग दो शब्दों से बना है: पंच (पांच) + अंग (तत्व या भाग)। अपने शुभ कार्यों व दैनिक गतिविधियों को इन खगोलीय ऊर्जाओं के साथ जोड़ना सफलता, मानसिक शांति और समृद्धि लाता है।

1. तिथि (Lunar Day)

सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12° की कोणीय दूरी को एक तिथि कहा जाता है। एक चंद्र मास में कुल 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष (बढ़ता चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता चंद्रमा) में 15-15 तिथियों में विभाजित होती हैं। तिथि कार्य की भावनात्मक ऊर्जा तय करती है।

2. नक्षत्र (Lunar Mansion)

आकाश मंडल 13°20' के 27 नक्षत्रों में विभाजित है। किसी समय विशेष पर चंद्रमा जिस नक्षत्र में गोचर कर रहा होता है, वह उस समय की मानसिक वृत्ति, यात्रा, विवाह और महत्वपूर्ण कार्यों के फल को सबसे अधिक प्रभावित करता है।

3. योग (Luni-Solar Harmony)

सूर्य और चंद्रमा के निरयण देशांतर के जोड़ को 27 भागों में बांटने से 27 योग बनते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, और रवि योग जैसे शुभ योग सभी दोषों को शांत कर कार्यों में निश्चित सफलता दिलाते हैं।

4. करण (Half Tithi)

एक तिथि के आधे भाग (6° दूरी) को करण कहा जाता है। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)। करण सूक्ष्म समय-खंड होता है जो व्यापार, आर्थिक निवेश, यात्रा और निर्माण कार्यों का सटीक मुहूर्त तय करता है।

5. वार (Solar Weekday)

स्थानीय सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि 'वार' कहलाती है। प्रत्येक वार के अधिष्ठाता ग्रह होते हैं (रविवार-सूर्य, सोमवार-चंद्र, मंगलवार-मंगल, बुधवार-बुध, गुरुवार-गुरु, शुक्रवार-शुक्र, शनिवार-शनि)।

राहुकाल में शुभ कार्य क्यों वर्जित हैं?

प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की अवधि छाया ग्रह राहु के आधिपत्य में होती है। नया व्यवसाय शुरू करना, अनुबंध पर हस्ताक्षर, विवाह, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य राहुकाल में करने से विघ्न आने की संभावना रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दैनिक पंचांग से जुड़े सामान्य प्रश्न

हिन्दू पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ज्योतिषीय गणना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न व उत्तर।

दृक पंचांग की गणना आधुनिक खगोलीय वेधशालाओं (NASA/JPL Ephemeris) द्वारा प्रमाणित प्रत्यक्ष आकाश में ग्रहों की वास्तविक स्थिति (चित्रापक्षीय/लाहिड़ी अयनांश) पर आधारित होती है। पारंपरिक सूर्य सिद्धांत प्राचीन औसत गति सूत्रों का उपयोग करता है। एस्ट्रोलॉजी डिवाइन शुद्ध और सटीक दृक गणित का उपयोग करता है ताकि आपको सही सूर्योदय और मुहूर्त समय मिल सके।

स्थानीय दोपहर के मध्य समय से लगभग 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद (कुल 48 मिनट) की अवधि को अभिजित मुहूर्त कहा जाता है। भगवान श्री हरि विष्णु के आशीर्वाद से युक्त यह मुहूर्त अधिकांश सूक्ष्म दोषों को नष्ट करने में समर्थ होता है और यात्रा, नए कार्य, गृह प्रवेश या व्यापार आरंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है (बुधवार को छोड़कर)।

वैदिक ज्योतिष में दिन की गणना स्थानीय सूर्योदय से होती है। किसी स्थान के अक्षांश (Latitude), देशांतर (Longitude) और ऊंचाई के कारण वहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर आता है, जिससे राहुकाल, चौघड़िया और तिथि समाप्ति काल भी कुछ मिनट भिन्न होते हैं।

पूर्णिमांत कैलेंडर में महीने का अंत पूर्णिमा (Full Moon Day) पर होता है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारतीय राज्यों (राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा) में प्रचलित है। अमान्त कैलेंडर में महीने का अंत अमावस्या (New Moon Day) पर होता है, जो गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मान्य है।

दिशा शूल की दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता। यदि यात्रा अति आवश्यक हो, तो वार अनुसार वैदिक उपाय करके ही निकलें: रविवार (पान या घी खाकर), सोमवार (दर्पण देखकर या दूध पीकर), मंगलवार (गुड़ या धनिया खाकर), बुधवार (तिल या गुड़ खाकर), गुरुवार (दही या पीली सरसों खाकर), शुक्रवार (दही या जौ खाकर), शनिवार (अदरक या उड़द खाकर)
स्थान अनुसार वैदिक पंचांग

प्रमुख धार्मिक तीर्थ व शहरों का दैनिक पंचांग

प्रत्येक स्थान के सटीक अक्षांश (Latitude) व देशांतर (Longitude) अनुसार स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि व शुभ मुहूर्त।

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